"हम भारत के लोग!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

भारतीय  सविधान  की प्रस्तावना :-
"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न,समाजवादी,  
पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त 
नागरिकों को : सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार
अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और 
अवसर  की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सबमें व्यक्ति की 
गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता  
बढाने के लिए दृढ  संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा 
में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 0 (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल 
सप्तमी, सम्वत् दो हजार छह विक्रमी) को एतदद्वारा इस संविधान 
को अंगीकृत,अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"
 
कभी सोचा की इनमे कितनी बाते सब समझ सकते है,या कभी  
समझने की  जरूरत समझी .जिन्होंने सविधान बनाया उस देशकाल  
परिस्थिति वो लोग हमारे हित संरक्षयक थे उन्होंने देश की आने वाली 
पीढ़ी के हितो को ध्यान में रखते हुए ,उस वक़्त सारे भारत वासियों  
की ओर से ये प्रस्तावना लिखी जो की आज तक एक भारतीय की 
"कसम " है अपने देश के लिए.परन्तु क्या आज इस कसम का  
नैतिक मूल्य उतना प्रासंगिक है लोगो के अंतरमन में आज प्रभुत्व  
सम्पन्ता व्यक्तिगत ,पंथ निरपेक्षता वोट बैंक,लोकतंत्रात्मक गणराज्य 
किताबो में रह गया है .सामाजिक न्याय अप्रासंगिक ,आर्थिक न्याय 
पूंजीपतियों के लिए रह गया है
विचार ओर अभिव्यक्ति का कोई स्थान नहीं ,विश्वास का  कोई आधार  
नहीं बचा धर्म और उपासना डलहोजी की निति को आज भी जिन्दा 
रखने की कोशिश है ,प्रतिष्ठा और अवसर समर्थ शक्तिशालियो के लिए 
रह गया है,इन सारी परिस्थितियों  में राष्ट्र की एकता अखंडता और  
बंधुत्व का किया होगा ये सायद अब समझाने का विषय नहीं होना चाहिए.
आज बहुत से लोग संविधान को बदलने की बात कह कर अपने को राष्ट्र 
का सच्चा भक्त साबित कर रहे है मेरा उन महान्भाओं से अनुरोध है  
कि कृपा करके एक बार सविधान को पढ़े फिर उसके दोष निकाले.कोई 
शायद अपने घर को गन्दा नहीं करता ,अगर गंदगी हो तो उसे साफ  
करता है ,गन्दा होने पर घर नहीं बदलता .और जो घर बदलता है तो 
क्या जरूरी है कि फिर गन्दा नहीं करोगे . 
हमारा लोकतान्त्रिक ढांचा अतुलनीय है हमारी व्यवस्तापक रूपरेखा 
संतुलित है.केवल व्यवस्था करने वाले का नैतिक पतन अपनी पराकाष्टा 
पर है .सोचो विचारो घर को साफ करो,घर को तोड़ने या बदलने कि 
बात मत करो .
 
 

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